Sunday, 26 April 2020

2.1 संविधान सभा की मांग


1 1916 में होमरूल लीग आंदोलन चला जिसमें घरेलू शासन संचालन की अंग्रेजों से मांग की
2 भारत मे संविधान सभा के गठन का विचार वर्ष 1934 मे पहली बार एम एन राय ने रखा।
3 सर्वप्रथम सन् 1895 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने यह मांग की थी कि अंग्रेजों के अधीनस्थ भारतवर्ष का संविधान स्वयं भारतीयों द्वारा ही बनाया जाना चाहिए लेकिन तिलक के सहयोगियों द्वारा भारत के लिए स्वराज्य विधेयक के प्रारूप को, जिसमें पहली बार भारत के लिए स्वतंत्र संविधान सभा के गठन की मांग की गई थी, ब्रिटिश सरकार द्वारा ठुकरा दिया गया था।

4  1922 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मांग की थी कि भारत का राजनैतिक भाग्य भारतीय स्वयं बनाएंगे। 1924 में पं. मोतीलाल नेहरू ने संविधान सभा के गठन की फिर मांग की लेकिन अंग्रेजों द्वारा उनकी मांग को भी ठुकरा दिया गया। तब से संविधान सभा के गठन की मांग लगातार उठती रही लेकिन अंग्रेजों द्वारा इसे हर बार ठुकराया जाता रहा।1929 में नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस का लौहार अधिवेशन हुआ जिसमें पूर्ण स्वराज की मांग की।
5 1935 में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार भारत के संविधान के निमार्ण के लिए अधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की मांग की।
6 1938 मे  भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस की ओर से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने घोषणा की कि स्‍वतंत्र भारत के संविधान का निमार्ण वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनी गई संविधान सभा द्वारा किया जाएगा और इसमें कोई बाहरी हस्‍तक्षेप नहीं होगा।
7 1936 में कांग्रेस का फैजलपुर सम्मेलन हुआ जिसमे कांग्रेस के मंच से पहली बार चुनी हुई संविधान सभा और संविधान निर्माण की मांग की।
’ 8 1939 में कांग्रेस अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि स्वतंत्र देश के संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा ही एकमात्र उपाय है और अंततः 1940 में ब्रिटिश सरकार ने इस मांग को मान लिया कि भारत का संविधान भारत के लोगों द्वारा ही बनाया जाए।
9 1942 में क्रिप्स कमीशन ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया कि भारत में निर्वाचित संविधान सभा का गठन किया जाएगा, जो भारत का संविधान तैयार करेगी।

भारतीय संविधान का गठन
कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों के आधार पर भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन जुलाई, 1946 ई० में किया गया.
मार्च 1946 में केबिनेट मिशन भारत भेजा गया जिसकी अध्यक्षता सरपेथिक लारेंसने की आैर दो अन्य सदस्य सर स्टेफर्ड क्रीम्स और एवी अलेक्जेंडर थे। कैबिनेट मिशन येाजना द्वारा सुझाए गए प्रस्‍तावों के तहत नवंबर मे 1946 मे  संविधान सभा का गठन हुआ।   संविधान सभा के कुल सदस्य 389 निर्धारित किए गए। जिसमें भारत से 292 सदस्य, चीफ कमिश्नरी से 4 सदस्य, देशी रियासतों से 93 सदस्य रखे। इसी आयोग की सिफारिश के आधार पर जुलाई 1946 में चुनाव सम्पन्न कराए गए जिसमे कांग्रेस ने 208, मुस्लिम लीग 73 और अन्य 15 सीटें जीते।   9 दिसंबर, 1946 ई० को संविधान सभा की प्रथम बैठक नई दिल्ली स्थित काउंसिल चैम्बर के पुस्तकालय भवन में हुई. सभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्‍यक्ष चुना गया. मुस्लिम लीग ने बैठक का बहिष्‍कार किया और पाकिस्तान के लिए बिलकुल अलग संविधान सभा की मांग प्रारम्भ कर दी. हैदराबाद एक ऐसी रियासत थी, जिसके प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित नहीं हुए थे. प्रांतों या देसी रियासतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में संविधान सभा में प्रतिनिधित्व दिया गया था. साधारणतः 10 लाख की आबादी पर एक स्थान का आबंटन किया गया था.प्रांतों का प्रतिनिधित्व मुख्यतः तीन समुदायों की जनसंख्या के आधार पर विभाजित किया गया था, ये समुदाय थे: मुस्लिम, सिख एवं साधारण.संविधान सभा में ब्रिटिश प्रातों के 296 प्रतिनिधियों का विभाजन सांप्रदायिक आधार पर किया गया- 213 सामन्य, 79 मुसलमान तथा 4 सिख. संविधान सभा के सदस्यों में अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की संख्या 33 थी.संविधान सभा में महिला सदस्यों की संख्या 12 थी. 11 दिसंबर, 1946 ई. को डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष निर्वाचित हुए. इस बैठक में उपाध्यक्ष एचसी मुखर्जी तथा वी0 टी0 कृष्‍णमचारी  थे दुसरे शब्‍दो मे संविधान सभा के दो उपाध्‍यक्ष थे और संवैधानिक सलाहकार बीएन राव थे।जब भी सभा की बैठक संविधान सभा के रूप मे होती इसकी अध्‍यक्षता डा0 राजेन्‍द्र प्रसाद करते और जब बतौर विधायिका होती तब इसकी अध्‍यक्षता जी0 वी0 मावलंकर करते थे । संविधान सभा 26 नवंबर 1949 तक इन दोनो रूपों मे कार्य करती रही ।संविधान निार्माताओं ने लगभग 60 देशो के संविधान का अवलोकन किया ।
 संविधान सभा की कार्यवाही 13 दिसंबर, 1946 ई. को जवाहर लाल नेहरू द्वारा पेश किए गए उद्देश्य प्रस्‍ताव के साथ प्रारम्भ हुई. 22 जनवरी, 1947 ई. को उद्देश्य प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद संविधान सभा ने संविधान निर्माण हेतु अनेक समितियां नियुक्त कीं. इनमे प्रमुख थी- वार्ता समिति, संघ संविधान समिति, प्रांतीय संविधान समिति, संघ शक्ति समिति, प्रारूप समिति.बी. एन. राव द्वारा किए गए संविधान के प्रारूप पर विचार-विमर्श करने के लिए संविधान सभा द्वारा 29 अगस्त, 1947 को एक संकल्प पारित करके प्रारूप समिति का गठन किया गया तथा इसके अध्यक्ष के रूप में डॉ भीमराव अम्बेडकर को चुना गया. प्रारूप समिति के सदस्यों की संख्या सात थी, जो इस प्रकार है:
i. डॉ. भीमराव अम्बेडकर (अध्यक्ष)
ii. एन. गोपाल स्वामी आयंगर
iii. अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यर
iv. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी
v. सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला
vi. एन. माधव राव (बी.एल. मित्र के स्थान पर)
vii. डी. पी. खेतान (1948 ई. में इनकी मृत्यु के बाद टी. टी. कृष्माचारी को सदस्य बनाया गया). संविधान सभा में अम्बेडकर का निर्वाचन पश्चिम बंगाल से हुआ था.
 3 जून, 1947 ई. की योजना के अनुसार देश का बंटवारा हो जाने पर भारतीय संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 324 नियत की गई, जिसमें 235 स्थान प्रांतों के लिय और 89 स्थान देसी राज्यों के लिए थे. देश-विभाजन के बाद संविधान सभा का पुनर्गठन 31 अक्टूबर, 1947 ई. को किया गया और 31 दिसंबर 1947 ई. को संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 299 थीं, जिसमें प्रांतीय सदस्यों की संख्या एवं देसी रियासतों के सदस्यों की संख्या 70 थी. प्रारूप समिति ने संविधान के प्रारूप पर विचार विमर्श करने के बाद 21 फरवरी, 1948 ई. को संविधान सभो को अपनी रिपोर्ट पेश की. संविधान सभा में संविधान का प्रथम वाचन 4 नवंबर से 9 नवंबर, 1948 ई. तक चला. संविधान पर दूसरा वाचन 15 नवंबर 1948 ई० को प्रारम्भ हुआ, जो 17 अक्टूबर, 1949 ई० तक चला. संविधान सभा में संविधान का तीसरा वाचन 14 नवंबर, 1949 ई० को प्रारम्भ हुआ जो 26 नवंबर 1949 ई० तक चला और संविधान सभा द्वारा संविधान को पारित कर दिया गया. इस समय संविधान सभा के 284 सदस्य उपस्थित थे.संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष, 11 महीना और 18 दिन लगे. इस कार्य पर लगभग 6.4 करोड़ रुपये खर्च हुए. संविधान के प्रारूप पर कुल 114 दिन बहस हुई.संविधान को जब 26 नवंबर, 1949 ई० को संविधान सभा द्वारा पारित किया गया, तब इसमें कुल 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं. वर्तमान समय में संविधान में 25 भाग, 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां हैं.संविधान के कुछ अनुच्छेदों में से 15 अर्थात 5, 6, 7, 8, 9, 60, 324, 366, 367, 372, 380, 388, 391, 392 तथा 393 अनुच्छेदों को 26 नवंबर, 1949 ई० को ही परिवर्तित कर दिया गया; जबकि शेष अनुच्छेदों को 26 जनवरी, 1950 ई० को लागू किया गया.संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी, 1950 ई० को हुई और उसी दिन संविधान सभा के द्वारा डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया.कैबिनेट मिशन के सदस्य सर स्टेफोर्ड क्रिप्स, लार्ड पेंथिक लारेंस तथा ए० बी० एलेक्ज़ेंडर थे.

नोट: 26 जुलाई, 1947 ई० को गवर्नर जनरल ने पाकिस्तान के लिए पृथक संविधान सभा की स्थापना की घोषणा की.
संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा। संविधान के निर्माण कार्य पर कुल 63 लाख 96 हजार 729 रुपये का खर्च आया।संविधान के निर्माण कार्य में कुल 7635 सूचनाओं पर चर्चा की गई।संविधान सभा की अंतिम बैठक संविधान निर्माण के लिए 24 नवम्बर 1949 में हुई, जिसमें 284 लोगों ने हस्ताक्षर किए। इसमें खास बात यह है कि राजस्थान से हस्ताक्षर करने वाले पहले व्यक्ति उदयपुर के बलवंत सिंह मेहता थे। इनके साथ ही प्रदेश से 12 सदस्य भेजे गए थे जिसमें 11 सदस्य देशी रियासतों से और एक चीफ कमिश्नेर था। संविधान को लागू करने से पहले 24 जनवरी 1950 को अंतिम बैठक बुलाई गई जिसमें डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद को राष्ट्रपति चुना गया, साथ ही राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान अपनाया गया।
इसी आधार पर अंतरिम सरकार का गठन 1946 में किया गया जिसमें 2 सितम्बर 1946 से कार्य करना प्रारंभ किया जिसमे मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया। इस सरकार का अध्यक्ष तात्कालिक वायसराय लार्ड वेवलऔैर उपाध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे।मार्च 1947 में माउंटबेटन भारत के वाईसराय बने उन्होंने 3 जून 1947 को एक योजना प्रस्तुत की जिसे जून योजना के नाम से जाना जाता है। इसे 18 जुलाई को ब्रिटेन के राजा ने पास कर दिया। योजना की क्रियान्विति 15 अगस्त 1947 के भारत स्वतंत्रता अधिनियम में हुई। जिसमें भारत को 2 डोमेनियम स्टेटों मे बांटा गया, भारत और पाकिस्तान और भारत से ब्रिटिश सम्राट के सभी अधिकार हटा लिए।
तीसरी बैठक 13 दिसम्बर 1946 को बुलाई गई जिसमें नेहरू ने उद्देश्य प्रस्तावपेश किया गया जिसे संविधान सभा ने 22 जनवरी 1947 को अपना लिया। इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर भारतीय संविधान की प्रस्तावना निर्मित की गई। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के लिए 13 समितियों का गठन किया गया।
प्रारूप समिति 29 अगस्त 1947 को गठित की गई और संविधान सभा की अंतिम बैठक संविधान निर्माण के लिए 24 नवम्बर 1949 को आयोजित की गई। इस दिन 284 लोगों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर करने वाले देश के पहले व्यक्ति जवाहरलाल नेहरू और राजस्थान से हस्ताक्षर करने वाले पहले व्यक्ति मास्टर बलवन्तसिंह मेहता थे।संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन की सिफारिश पर किया गया था जिसने 1946 मे भारत का दौरा किया।
फ्रांस की तरह इस सभा के सबसे वरिष्‍ठ सदस्‍य को इसका अध्‍यक्ष चुना गया । संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन हाल (जिसे अब संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के नाम से जाना जाता है ) में हुई थी ।श्री सच्चिदानंद सिन्हा संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष निर्वाचित किए गए थे ।डॉ राजेन्द्र प्रसाद बाद में संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष बने ।13 दिसम्बर 1946 को पंडित जवाहर लाल नेहरु ने भारतवर्ष को एक स्वतंत्र संप्रभु तंत्र घोषित करने और उसके भावी शासन के लिए एक संविधान बनाने के दृढ़ संकल्प से उद्देश्य संकल्प प्रस्तुत किया ।
पहली बैठक केवल 211 सदस्यों के साथ 9 दिसंबर 1946 को आयोजित किया गया था जिसका (मुस्लिम लीग नें बहिष्कार किया था.)
रियासतों नें चुनाव से दूर रहने का फैसला किया था अतः उनकी सीटें खाली रह गईं.
हालांकि, 3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना की स्वीकृति के बाद अधिकांश रियासतों के लोग इसमें शामिल हो गए. इस योजना के बाद एक अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जिसमे संविध्हन सभा को पूरी तरह से एक संप्रभु निकाय घोषित किया गया और उसे विधानसभा के रूप में स्वीकार किया गया.
संविधान सभा नें संविधान का मसौदा तैयार किया:
मई 1949 में राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता का अनुमोदन किया गया.
• 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज अपनाया.
• 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गीत अपनाया.
राष्ट्रीय गान 24 जनवरी, 1950 को अपनाया गया.
• 24 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद निर्वाचित हुए.
मसौदा समिति
मसौदा समिति को प्रारूप समिति भी कहा जाता है. संविधान सभा कई समितियों को सम्मिलित किये हुए थी. इसके अंतर्गत सदन समिति, प्रक्रिया समिति और अन्य कई समितियां थी. लेकिन सबसे प्रमुख समिति थी मसौदा समिति अर्थात प्रारूप समिति. इसका गठन 29 अगस्त, 1947 को किया गया था और नए संविधान का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा गया था.
कुछ ऐसे आधार हैं जिनके आधार पर आलोचकों नें संविधान सभा का मूल्यांकन किया था जोकि प्रमुख हैं.
1. कुछ सदस्यों का मानना था की संविधान सभा में नियुक्त किये लोग पूरी तरह से भारत की जनता द्वारा निर्वाचित नहीं किये गए जोकिथे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर मान्य किया जाना चाहिए था, अतः संविधान सभा एक प्रतिनिधि सभा नहीं था.
2. आलोचकों का यह भी मानना था की संविधान सभा ब्रिटिश सरकार के द्वारा बनाई गई है और उसी सरकार की अनुमति के साथ इसने अपने सभी सत्र को आयोजित किया था, अतः यह एक संप्रभु सभा नहीं था.
3. ग्रानविले ऑस्टिन नें इसे 'एक एक पार्टी वाले देश में एक पार्टी की सरकार वाला ' संविधान सभा कहा है. आलोचकों नें अपने विचारों को साझा करके यह विचार व्यक्त किया है की विधानसभा में कांग्रेस का ही केवल वर्चस्व.
4. कुछ आलोचकों का यह मानना था की यह सिर्फ और सिर्फ एक हिन्दू सभा थी(लार्ड विसकाउंट). जोकि देश के एक मात्र बड़े समुदाय का प्रतिनिधित्व करता था(विंस्‍टन चर्चिल).
संविधान सभा की विभिन्न समितियोँ के अध्यक्ष
समिति
अध्यक्ष
प्रक्रिया विषयक नियमों संबंधी समिति
राजेन्द्र प्रसाद
संचालन समिति
राजेन्द्र प्रसाद
वित्त एवं स्टाफ समिति
राजेन्द्र प्रसाद
प्रत्यय-पत्र संबंधी समिति
अलादि कृष्णास्वामी अय्यर
आवास समिति
बी पट्टाभि सीतारमैय्या
कार्य संचालन संबंधी समिति
के.एम. मुन्शी
राष्ट्रीय ध्वज संबंधी तदर्थ समिति
राजेन्द्र प्रसाद
संविधान सभा के कार्यकरण संबंधी समिति
जी.वी. मावलंकर
राज्यों संबंधी समिति
जवाहर लाल नेहरू
मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक एवं जनजातीय और अपवर्जित क्षेत्रों संबंधी सलाहकार समिति
वल्लभ भाई पटेल
अल्पसंख्यकों के उप-समिति
एच.सी. मुखर्जी
मौलिक अधिकारों संबंधी उप-समिति
जे. बी. कृपलानी
पूर्वोत्तर सीमांत जनजातीय क्षेत्रों और आसाम के अपवर्जित और आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्रों संबंधी उपसमिति
गोपीनाथ बारदोलोई
अपवर्जित और आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्रों (असम के क्षेत्रों को छोड़कर) संबंधी उपसमिति
ए.वी. ठक्कर
संघीय शक्तियों संबंधी समिति
जवाहर लाल नेहरू
संघीय संविधान समिति
जवाहर लाल नेहरू
प्रारूप समिति
बी.आर. अम्बेडकर
संविधान सभा के प्रमुख सदस्य
(Prominent members of Constitutional Assembly)
कांग्रेसी सदस्य
ग़ैर कांग्रेसी सदस्य
महिला सदस्य
सदस्यता अस्वीकार करने वाले व्यक्ति
सरदार वल्लभ भाई पटेल
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी
श्रीमती हंसा मेहता
तेजबहादुर सप्रू
पं जवाहर लाल नेहरू
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
सरोजिनी नायडू
जयप्रकाश नारायण
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
सर अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर


पं. गोविंद बल्लभ पंत
प्रो. के. टी. शाह


मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
पं. हृदयनाथ कुंजरू


राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन
डॉ. भीमराव अम्बेडकर


बालगोविंद खेर
डॉ. जयकर


आचार्य जे.बी. कृपलानी
टेकचंद बख्शी


डॉ. राजेंद्र प्रसाद
एन. गोपालास्वामी आयंगर



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